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जीएसटी भुगतान की आखिरी तारीख और देरी से भुगतान पर ब्याज

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जीएसटी भुगतान की आखिरी तारीख

व्यापारियों को जीएसटी का भुगतान महीना समाप्त होने के बाद 20 दिन में करना होगा । कम्पोजीशन स्कीम में पंजीकृत व्यक्तियों को जीएसटी का भुगतान त्रैमासिक करना होगा, त्रैमास ख़तम होने के 18 दिन के अंदर ।

जीएसटी भुगतान की आखिरी तारीख और रीटर्न भरने की आखिरी तारीख एक ही है, और जीएसटी का भुगतान किये बिना रीटर्न नही भरी जा सकती ।

जुलाई 2017 और अगस्त 2017 के लिए भी भुगतान की आखिरी 20 अगस्त 2017 और 20 सितम्बर तारीख ही है ।

GST Payment and Input Tax Credit Calculator

जीएसटी भुगतान के सम्बंध में नियम

इंटर्नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, NEFT, RTGS या किसी भी अन्य मोड द्वारा किये गए कर, ब्याज, दंड, शुल्क या किसी अन्य राशि का भुगतान व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक कैश खाता बही में जमा किया जाएगा । व्यक्ति के इलेक्ट्रॉनिक कैश खाता बही की राशि कर, ब्याज, दंड, शुल्क या इस अधिनियम के तहत देय किसी अन्य राशि के भुगतान के लिए इस्तेमाल की जा सकती है ।

टैक्स के पेमेंट के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है । इनपुट टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल ब्याज, पेनल्टी और दूसरे पेमेंट के लिए नहीं किया जा सकता । किसी व्यक्ति द्वारा electronic credit ledger में गलती पाए जाने पर फॉर्म PMT -04 द्वारा अफसर को सूचित करना होगा ।

भुगतान चालान GST PMT- 06 के द्वारा किया जाएगा । सफल भुगतान के बाद भुगतान करने वाले को चालान आयडेंटिफ़िकेशन नम्बर (CIN) दिया जायेगा । यदि व्यक्ति को CIN नहीं मिला है या रीटर्न भरते वक़्त सिस्टम CIN गलत बताता है तो उसके लिए Form GST PMT-07 भरना होगा ।

पहले से विपरीत अब रात को 8 बजे के बाद किये गए ऑनलाइन पेमेंट को भी रजिस्टर्ड व्यक्ति के खाते में उसी दिन क्रेडिट कर दिया जायेगा ।
चालान gst.gov.in द्वारा ही निकला जा सकता है, हाथो से भरा हुआ या किसी अन्य सॉफ्टवेयर से बने हुए चालान से पेमेंट नहीं किया जा सकता है । टैक्स, ब्याज, फीस, पेनल्टी या कोई अन्य भुगतान एक ही चालान के द्वारा किया जा सकता है ।

बैंक के काउंटर पर एक दिन में और एक टैक्स अवधि (मासिक या त्रैमासिक) के लिए रु. 10,000 तक का भुगतान नकद, चेक या डिमांड ड्राफ्ट के द्वारा किया जा सकता है । इससे ज्यादा का भुगतान केवल डिजिटल मोड जैसे की इंटर्नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड, NEFT, RTGS से किया जा सकता है ।

यह प्रतिबन्ध निम्न मामलो में नहीं लगेगा

  • सरकारी विभाग द्वारा भुगतान पर
  • कमिश्नर द्वारा अधिसूचित व्यक्तियों द्वारा भुगतान पर
  • जीएसटी अफसर द्वारा बकाया टैक्स वसूली के समय

चालान के सम्बन्ध में नियम

  • चालान भरने के 15 दिनों के लिए वैध होगा
  • CPINके निकलने के बाद, चालान की राशि में कोई भी बदलाव बैंक के पोर्टल पर नहीं किया जा सकता है। किसी भी नए या सेव किये गए चालान को तैयार किए जाने से पहले तब तक संशोधित किया जा सकता है जब तक कि CPIN उत्पन्न न हुआ हो । राशि में किसी भी परिवर्तन के लिए आपको एक नया चालान बनाना होगा। किसी चालान को काम में नहीं लिया जाता है, तो 15 दिनों के बाद स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।
  • प्रत्येक चालान के लिए एक अलग चैक या डीडी जारी करना पड़ेगा। हर एक चालान के भुगतान के लिए बैंक BRN (Bank Reference Number) जारी करेगा।
  • जीएसटी पोर्टल पर लॉगिन होने के बाद आप अधूरे भरे हुए चालान को सेव भी कर सकते है। सेव किये हुए चालान को Services > Payments > My Saved Challans पर जा कर देखा जा सकता है । किसी भी समय पर आप एक साथ अधिक से अधिक 10 चालान सेव कर सकते है । सेव किया हुआ चालान 7 दिनों के लिए वैध होगा ।
  • यदि आपने एक टैक्स अवधि के लिए १०,००० रूपए का ओवर दा काउंटर (OTC चालान बनाया हुआ है तो आप और OTC चालान नहीं बना सकते जब तक की वह चालान आप रद्द नहीं कर देते या वह स्वतः ही रद्द नहीं हो जाता।
  • चैक या DD से भुगतान की स्थिति में चैक या DD पास होने वाली तारीख को ही भुगतान की तारीख माना जायेगा ।
  • यह जरुरी नहीं है की जिसको टैक्स जमा करवाना है उसी का बैंक खाता काम में लिया जाये। एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के खाते से भी टैक्स का भुगतान कर सकता है ।
  • जीएसटी पोर्टल पर लॉगिन होने के बाद Services > Payments > Challan History पर भुगतान किये हुए चालान को देखा जा सकता है ।
  • पोर्टल पर लॉगिन हुए बिना भी Services > Payments > Track Payment Status पर भुगतान किये हुए चालान को देखा जा सकता है ।

व्यक्ति द्वारा किये गए भुगतान को निचे दिए गए क्रम में ही समायोजित किया जायेगा

  1. पिछली अवधि के बचे हुए टैक्स और अन्य बकाया राशि
  2. अभी चल रहे महीने के टैक्स और अन्य बकाया राशि
  3. जीएसटी में बाकि और कोई बकाया राशि और सेक्शन 73 या 74 की डिमांड

देरी से भुगतान पर ब्याज

यदि टैक्स का भुगतान नियत तिथि तक नहीं किया जाता है तो बकाया राशि पर 18% की दर से ब्याज देना होगा ।

यदि व्यक्ति इनपुट टैक्स क्रेडिट का अनुचित या ज्यादा का दावा कर लेता है तो उसे ऐसे अनुचित या ज्यादा दावे पर भी 24% की दर से ब्याज देना होगा ।

देरी से भुगतान पर पेनल्टी

यदि टैक्स का भुगतान नियत तिथि से 3 महीने के अंदर नहीं किया जाता है तो निम्न में से जो भी ज्यादा हो वह पेनल्टी के रूप में देना होगा ।

  • 10,000 रु
  • भुगतान नहीं किये गए पैसो पर 10%

यदि किसी व्यक्ति ने खातों या रिटर्न्स में गड़बड़ी की है और टैक्स नहीं दिया है तो निम्न में से जो भी ज्यादा हो वह पेनल्टी के रूप में देना होगा ।

  • 10,000 रु
  • कम या नही दिए गए टैक्स पर 100%

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